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Tuesday, June 25, 2024
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राम को देख कर श्री जनक नंदिनी लिरिक्स

राम को देख कर श्री जनक नंदिनी लिरिक्स

राम को देख कर श्री जनक नंदिनी लिरिक्स

राम को देख कर श्री जनक नंदिनी लिरिक्स

भारतीय संस्कृति में श्री राम और माता सीता की कथा अनंत है। इनकी पावन प्रेम कहानी, त्याग और समर्पण की मिसाल के रूप में सदियों से हमारे दिलों में बसी हुई है। आज हम इस ब्लॉग में श्री राम और माता सीता की महिमा का गुणगान करेंगे और “राम को देख कर श्री जनक नंदिनी” के लिरिक्स पर चर्चा करेंगे।

राम को देख कर श्री जनक नंदिनी

राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी,
राम देखे सिया माँ सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी….

थे जनकपुर गये देखने के लिए,
सारी सखियाँ झरोकान से झाँकन लगी,
देखते ही नजर मिल गयी दोनों की,
जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी….

बोली है एक सखी राम को देखकर,
रच दिए है विधाता ने जोड़ी सुघर,
पर धनुष कैसे तोड़ेंगे वारे कुंवर,
सब में शंका बनी की बनी रह गयी….

बोली दूजी सखी छोटन देखन में है,
पर चमत्कार इनका नहीं जानती,
एक ही बाण में ताड़िका राक्षसी,
उठ सकी ना पड़ी की पड़ी रह गयी….

राम को देख कर श्री जनक नंदिनी,
बाग में जा खड़ी की खड़ी रह गयी,
राम देखे सिया माँ सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी….

निष्कर्ष

श्री राम और माता सीता का भजन “राम को देख कर श्री जनक नंदिनी” हमें उनके मिलन और प्रेम की अद्भुत कहानी सुनाता है। इस भजन में वर्णित है कि जब श्री राम मिथिला नगरी में धनुष-तोड़ने के लिए आए, तो वहां की राजकुमारी सीता उन्हें देखकर मुग्ध हो गईं। उनकी सखियां भी दोनों के प्रेम के बंधन को देखकर चकित रह गईं। इस प्रकार, यह भजन प्रेम और विवाह की पवित्रता को दर्शाता है।

लेकिन इस भजन में केवल राम-सीता के प्रेम की ही नहीं, बल्कि श्री राम के पराक्रम और शक्ति का भी वर्णन है। जैसा कि एक सखी कहती है कि श्री राम ने एक ही बाण से ताड़का नाम की राक्षसी का वध कर दिया था। यह उनकी महान शक्ति और धर्म की रक्षा के लिए संकल्प को दर्शाता है।

इस प्रकार, “राम को देख कर श्री जनक नंदिनी” भजन न केवल एक प्रेम कहानी है, बल्कि यह हमें धर्म, शक्ति और समर्पण के महान आदर्शों को भी सिखाता है। श्री राम और माता सीता के जीवन से हम सीखते हैं कि प्रेम में समर्पण होना चाहिए, और साथ ही साथ हमें धर्म के मार्ग पर भी चलना चाहिए।

अंत में, यह भजन हमें याद दिलाता है कि प्रेम और धर्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हमें अपने जीवन में दोनों को संतुलित करना चाहिए।

श्री राम और माता सीता के जीवन से हम सीखते हैं कि कैसे एक साथ रहकर भी हम अपने लक्ष्यों और आदर्शों को पूरा कर सकते हैं। यही है इस भजन का मूल संदेश।

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